
अपनों के बीच जो गहरी बात होती है,
वही तो रिश्तो की असली सौगात होती है।
ना कोई परदा ना कोई बनावटी चेहरा जहां,
लिए विश्वास का रंग वही गहरी छाप होती है।
हृदय के द्वार जब साथ मिलकर खुलते हैं,
सारे गिले शिकवे फिर पल में घुलते हैं।
वो हंसी वो ठिठौली और वो छोटी सी तकरार,
यही बढ़ाते हैं आपस में निस्वार्थ प्यार।
सच्ची बातें ही जीवन का आधार बनती है,
दो दिलों के बीच एक मजबूत दीवार बनती है।
दुनिया की भीड़ में जब हम अकेले पड़ जाते,
यही पुराने किस्से फिर से जीना सिखाते।
“आकाश” सा विस्तार हो बातों में सदा ही,
ताकि हम हरमुश्किल में सदा मुस्कुराते।
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पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




