साहित्य

ये दुनिया लड़ाई से परेशान

कुलदीप सिंह रुहेला

लड़ाई से दुनिया परेशान, हर गली में तूफ़ान,
कभी मियां-बीवी का रण, कभी बच्चों की तकरार महान।
कभी प्रेमी-प्रेमिका रूठे, जैसे युद्ध का ऐलान,
अब तो देशों की सरहद पर भी, जलता है अरमान।

बर्तन बोले ठन-ठन घर में जैसे जंग छिड़ी,
रोटी तक भी डर जाए आज किसकी होगी पिटाई
बच्चे कहते मम्मी मेरी पापा बोले बस करो
छोटे-छोटे मुद्दों पर भी, बन जाता है महाभारत करो।

वो भी क्या इश्क़ हुआ, जो हर बात पे टूट जाए,
“लास्ट सीन से शुरू होकर, ब्लॉक तक जा पहुँच जाए।
चैट में आग स्टेटस में तीर, दिल में उठे बवंडर,
प्यार का मंदिर लगता अब, जैसे युद्ध का अंदर।

देश-देश भी भिड़ रहे हैं, जैसे बच्चे खिलौनों पर,
शांति की बातें होतीं कम, ज़्यादा जोर हथियारों पर।
नेता जी के भाषण में भी आग का ही स्वाद,
जनता बेचारी सोच रही कब आएगा वो दिन आबाद

अरे छोड़ो ये लड़ाई-झगड़ा, थोड़ा सा मुस्कुरा लो,
रूठे दिलों को जोड़ो यारो, प्यार का दीप जला लो।
न तकरार में कुछ पायान अहंकार में जीत,
हँसी बाँटो, गीत गाओ—यही है असली प्रीत।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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