
मेरे आँसू बात नहीं हैं..
उसका जीवन साथ नहीं है..
बहता था खुशबू का झरना..
वो अब मेरे पास नहीं है..
उसके जीवन का था सपना..
जीवन में एक घर हो अपना..
प्यार के जिसमें फूल खिले हों..
खुशबू की बहती नदियां हों..
एक कमल की डाली हो वो..
चंचल चितवन वाली हो वो..
प्यार को मेरे पाये वो भी..
मुझ सी किस्मत वाली हो वो..
पर आशा और निराशा का ..
संगम ही यह जीवन है..
मुरझाई एक डाली है वो..
ना ही किस्मत वाली है वो..
उसका जीवन मेरा था पर..
मैं ही उसका ना हो पाया ..
प्यारा था मुझको जीवन जो..
उसमें प्यार पनप ना पाया ।।
यह मेरी मौलिक कृति है।
रूपेश कुलश्रेष्ठ *स्नेह*
आगरा, उत्तर प्रदेश




