
माँ ब्रम्हचारिणी आ जाओ ये मन तुम्हैं पुकार रहा!
आकर मइया दर्शन दे जाओ ये मन तुम्हैं निहार रहा!!
एक हाथ में माला पकड़े दूजे हाथ कमण्डल है!
तप और त्याग तपस्या के मन से तुम्हैं बिचार रहा!!
सबकी की झोली को भर देतीं कोई यहाँ न खाली है!
तेरे दर की बात निराली मन तुम्हीं में लगा रहा!!
बेलपत्र को खाकर माँ शिव अर्चन में लगीं रही!
शिव शंकर को पति रूप में पाने को मन रमा रहा!!
देव सभी तेरे गुण गाते नारद ऋषि भी मोद मनाते!
तेरे बराबर कोई नहीं मां मन मेरा झंकार रहा!!
जो भी तेरे दर पर आते रिद्धि- सिद्धी पा जाते माँ
उषा के आने से पहले माँ भक्तों का तांता लगा रहा!!
डॉ उषा अग्रवाल
छतरपुर मध्य प्रदेश



