साहित्य

कालरात्रि

आशा बिसारिया

कलियों से भवन सजाया,
तुमको मनाएंं मांँ
आ जाओ कालरात्रि ,
तेरी आरती गाएँ माँ
आ……….
तू श्याम वर्णी है माँ,
तू सबसे निराली है
अपने प्यारे भक्तों की,
करती रखवाली है
मुद्रा है तेरी अभय की,भक्तों को भाए मांँ
आ……
तू शक्ति से जन्मी है,
उसकी अवतारी है
तेरे गले मुंड की माला,
गर्दभ की सवारी है
हाथों में खड्ग चमकता,दुष्टों को डराए मांँ
आ……..
जब रक्तबीज ने भारी,
हाहाकार मचाया था
तब उसका मर्दन करके,
भक्तों को बचाया था
तू धरती पै आ जाए,जब संकट आए माँ
आ………
तू शुभंकरी कहलाती,
सबका शुभ करती है
तू लीला काली बनके ,
अमावस को पुजती है
कहीं नीलसरस्वती बनके,बेड़ा पार लगाए माँ
आ……..
आशा बिसारिया चंदौसी उ.प्र.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!