साहित्य

ग़ज़ल

आशा बिसारिया

समझो दुनिया एक सराय
आने वाला आता है और जाने वाला जाय..
दुनिया को कहते हैं फानी
फितरत इसकी आनी जानी
दम भर शाख पे बैठा पंछी पल भर में उड़ जाय
समझो….
रंग- रूप का गुमां है कैसा
ना रहे शोहरत ना रहे पैसा
दोनों जहां का वो है मालिक जो तू बोए वो पाय
समझो…
घर है किराए का यह समझ ले
नेक काम कुछ अब भी कर ले
सांसों का यह तार न जाने टूटके कब गिर जाय
समझो…..
गजानन वंदना
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शुभ मंगल के दाता गजानन,
मंगल के दाता…….
शिवशंकर हैं पिता तुम्हारे
पार्वती हैं माता……..
ऋद्धि सिद्धि हैं नारी तुम्हारी
कार्तिकेय हैं भ्राता………
मूषक जैसी तुम्हरी सवारी
लड्डू भोग सुहाता………
अन्धन को तुम आंँख देत हो
कोढ़ी काया पाता……..
बाँझन को तुम पुत्र देत हो
निर्धन माया पाता……..
जो भी तुम्हरी शरण में आता
वो ही नर तर जाता…..

आशा बिसारिया चंदौसी,उ०प्र०

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