
निर्विन्ध्या है विंध्य पर्वत की,
एक प्रमुख सरिता।
हमारी निर्विन्ध्या भी है,
एक गुणी ललिता।
निर्विन्ध्या थी शिक्षिका,
आपने जलाई ज्ञान की ज्योति।
आप समाजसेविका बनकर,
बनाई अनुपम संस्कृति।
निर्विन्ध्या की पुण्यतिथि पर,
हमलोग कर रहे हैं स्मरण।
आपकी कीर्तियों पर,
आपको कर रहे हैं नमन।
पापा ने आपको संभाला ,
आपको बनाया नेक इंसान।
आपका बेटा प्रणित,
अवश्य बनाएगा अपनी पहचान।
दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना (बिहार)




