साहित्य

संगी साथी पुस्तकें

सुषमा श्रीवास्तव

जीवन का वरदान हैं पुस्तकें,
आजीवन राह दिखाएं पुस्तकें।
जो हर घड़ी व्यवहार करें मित्रवत,वो होती हैं पुस्तकें।
पुस्तक में होती नई खोज, पुस्तक से मिलती नई सोच।
बोलने से पहले सोचें, सोचने से पहले पढ़ें।
ना हो आपसे समाधान तो ले लें पुस्तकों से समाधान।
पुस्तकें ज्ञानवान होती हैं, यह देश की शान होती हैं।
सदा सदा के लिए अमर कर दे तथ्य औ विचार, वो होती हैं पुस्तकें।
समग्र समाज का मार्गदर्शन जो करें, वो पुस्तकें होती हैं।
विचारों और ज्ञान का खादान जो,वो होती हैं पुस्तकें।
सद्ग्रंथ से अच्छा कोई मित्र नहीं,
इन ग्रंथों में ही भरा ज्ञान का भण्डार, आजीवन साथ निभाए जो,वो पुस्तकें होती हैं।
कितना कुछ कहूँ? मन भरता नहीं जिससे, वो ही होती हैं पुस्तकें।
कभी अकेला न छोड़ें, वो ही होती हैं पुस्तकें।
सर्वोत्तम उपहार हैं पुस्तकें,
देने वाले को अविस्मरणीय बनाएं,
स्मृतियों में अमर रहतीं हैं पुस्तकें।।

रचनाकार –
सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन,©®, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।

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