साहित्य

कृतिकार, समरस संस्थान एवं जकासा की संयुक्त गोष्ठी सम्पन्न

कभी-कभी लगता है जैसे, आया विषम जमाना है । कब घिर जाये काले बादल, बोलो किसने जाना है ।। युद्ध छिड़ाते उकसा कर के, फिर दिखलाते दातारी, छाये जब युद्धों के बादल, लुटता तभी खजाना है : लक्ष्मण लड़ीवाला

श्री भैरोंसिंह शेखावत सभागार, चैंबर भवन, जयपुर में कृतिकार, समरस संस्थान एवं जकासा की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन श्री लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’ अध्यक्षता, श्री वरुण चतुर्वेदी के मुख्य आतिथ्य एवं विशिष्ट अतिथि श्रीमती पूजा उपाध्याय जी के सानिध्य में श्री राव शिवराजपाल सिंह की सरस्वती वंदना के साथ प्रारंभ हुआ । गोष्ठी का सफल संचालन जकासा के संस्थापक श्री किशोर पारीक ‘किशोर’ जी द्वारा किया गया ।

श्री किशोर पारीक किशोर जी ने भगवान परशुराम जयंती की पूर्ण संध्या पर अपनी लोकप्रिय रचना सुनाई । श्री भूपेन्द्र प्रजापति ने बैसाखी पर रचना पढ़ी -‘वसुधा ने शृंगार किया है, गाँव और शहर में देखो मौसम बदल रहा है।’ वही श्री अरुण गर्ग ने मार्मिक रचना ‘जिस देश की जनता भूखी हो, वह आजादी रुखी है’ सुनाकर तालियाँ बटोरी । श्री रमेश चन्द शर्मा चिंतक जी ने – ‘ हिम्मत न हारो कभी जग में, जीवन कष्ट भरा इतिहास है। जीवन डोर सँभालो अपनी, जीते जी सब आस है’ सुनाकर दाद पायी । श्री नवल किशोर शर्मा जी ने जिंदगी का यह कैसा दौर है, दूर के बड़ों से जोड़ लिए है रिश्ते, पड़ोसियों से अनबन है । श्रीमती रंजिता जोशी तुलसी ने – एक बात तो बताइए, हमें सच के आईने से अवगत कराइए सुनाकर वाह वाही लूटी ।

*राव शिवराजपाल सिंह जी ने सीबीएसी परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से ऊपर अंकों से पास करने पर तंज कसते रचना पढ़ते कहा कि दसवीं में फेल नहीं हुआ अगर कोई, तो मंत्री बन कौन धर्म निभाएगा ।डॉ. सत्यनारायण शर्मा जी ने – उसकी नजरों में थी वासना छल भरी, यह कुरंजी उसी भेडिए पर मरी। मार्मिक रचना सुनकर सबका दिल जीता । श्रीमती पूजा उपाध्याय जी ने लोकतंत्र में भीड़तंत्र पर व्यंग्य कसते कहा कि ‘ जो जितनी भीड़ जुटा लेता है,वह भी राजा बन जाता है ।’ और ‘आओ चार दिन जी जिंदगी में हँसने का बहाना ढूंढे’ की सभी ने सराहा ।

*वरिष्ठ कवि श्री वरुण चतुर्वेदी की ने महिलाविधेयक गिरने पर व्यंग्य करते हँसने को मजबूर करते कहा –
*जो रोते हो उन्हें हँसाने का केवल जोकर में दम है, हँसने वाले क्या जाने उसके अंतर्मन कितना गम है ।

*श्री लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’ ने अक्षय तृतीया में गीत – ‘त्रेता युग से द्वापर युग तक, जिसकी गाथा सुनी महान । यहाँ दूसरा परशुराम सा, फिर जन्में कोई बलवान ।।
*शुभ घड़ी अक्षय तृतीया में, लिया विष्णु ने फिर अवतार।
*महादेव से मिली शक्तियाँ, परशु उठाकर करते वार ।।

*अंतर में गोष्ठी में पधारे सभी कवियों का आभार व्यक्त व्यक्त किया ।

*-किशोर पारीक किशोर,संचालक

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