
भारतवासी एक हैं,सबके धरम अनेक।
ज्यों बगिया में फूल हों,लगते कितने नेक।।
विविध विविध भाषा यहां,भिन्न भिन्न त्यौहार।
हिंदू मुस्लिम सिख सभी,ज्यों मोती का हार।
अलग अलग रिवाज सभी,अलग अलग हैं वेश।
अलग सी पहचान लिए,सुंदर भारत देश।।
भारतवासी आपसी,रखते हैं सब प्यार।
जाति धर्म का भेद मत,करना तुम स्वीकार।।
विकसित अपना देश हो,जग में फैले नाम।
भारतवासी एक सब, भाषा अलग तमाम।।
डॉ नवनीता दुबे नूपुर©®✍️मंडला,मध्यप्रदेश।मौलिक,अप्रकाशित रचना।
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