
क्या कहती है सर सर
बहती हवा
रहने तो साफ, निर्मल इसे
मत घोलो जहर प्रदूषण का
बना दमघोटू।
क्या कहता है कल कल
बहता जल
मत करो बरबाद इसे यूँ
खोल खुले नल
जितनी ज़रूरत हो उतना
ही करो इस्तेमाल
वरना एक एक बूंद को
पड़ेगा तरसना जो आज
नहीं की कदर इसकी।
क्या कहता है व्यर्थ में चलता
पंखा, बल्ब , ट्यूब लाइट
जितनी ज़रूरत उतनी ही
करो खपत, मत करो यूँ
बेकार में बिजली की खपत।
क्या कहता है लहलहाता पेड़
मत काटो बेवजह
नहीं रहेंगे पेड़, पौधे तो होगी
हरियाली खुशहाली कैसे
यूँ काट काट पेड़ों को बनाते
जा रहे हो ज़मीन बंजर ।
क्या कहती हैं पर्वत , नदी,
झरने, जंगल
मत करो छेड़छाड़ पर्यावरण से
वरना होंगे बुरे परिणाम
हो रहे हालात बद से बतर
कभी तीव्रगति के भूकंप,
कभी लैंडस्लाइड,
कभी चक्रवाती तूफान,
कभी बाढ़, कभी सूखा,
कभी ज़रूरत से ज़्यादा बारिश
सुन लो, समझ लो,
कर लो अब तो अमल
क्या कहती है प्रकृति तुम से
रहेगा सुरक्षित पर्यावरण तो
रहेगी सुरक्षित ज़िन्दगी भी
साथ ही करनी होगी
बचत बिजली हो न ज़िन्दगी अंधेरी
पानी की भी रह न जाएं प्यासे
और रखना होगा हवा को भी साफ
ताकि खुल के ले सकें सांस
पर्यावरण संरक्षण ही एकमात्र
उपाय है खुशहाली का
मत करो अनदेखा इसे बन अंजान।।
…… मीनाक्षी सुकुमारन
नोएडा




