साहित्य

कर्मवीर

उदय किशोर साह

तोड़ दो सारे नापाक वो जंजीरे
जो तेरे इरादे पे लगाये    ताला
छोड़ दो सारे नाकाम वो सहारे
जो तुम्हें बाँधे है       हुजूरेवाला

कदम तो बढ़ाओ बुला रही मंजिल
उम्मीदों की बाँह है तेरे लिये पसारे
निकल पड़ो अब उस गन्तव्य  पर
जो तुम्हें बुला रहे हैं।     मेरे प्यारे

जग में कुछ भी कठिन नहीं   है
हर मुश्किल भरा पथ है आसान
भले ही पथ में काँटा पैर में चुभोये
डट कर करना तुँ बन कर दृढ़वान

कालनेमी कदम   कदम पे बैठा है
पर असलियत ख़ुल ही     जाता है
सच्चाई का मार्ग      भले कठिन है
पर  सफलता सबको मिल आता है

डर कर मत बैठो तुँ   अपने घर पे
तुँ है जग का एक   सच्चा धर्मवीर
हार मान लेना  तेरे लियेअनुचित है
क्योंकि तुम ही एक पूत   कर्मवीर

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार

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