
लाल रंग का गुलाब प्रीत का प्रतीक मान,
केश में न आप मिथ्य प्रेम से लगाइए।
बाट जोह मैं रही अधीर त्रस्त हो उदास
क्यों हुआ विलंब सत्य तथ्य तो बताइए।
मंद-मंद मुस्कुरा रहे बने हुए अबोध,
झूठ-मूठ ढोंग से मुझे नहीं जलाइए।
कान आप बालमा उमेठिए समस्त सांध्य,
दंड आपका यही पुनः पुनः निभाइए।।
डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश




