फायकू सम्मेलन संपन्न: लघु काव्य में गहन भावों की सजीव प्रस्तुति
दि ग्राम टुडे/संवाददाता

दि ग्राम टुडे अनिल अभिव्यक्ति तथा ओपन डोर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित फायकू सम्मेलन साहित्यिक गरिमा और रचनात्मक ऊर्जा के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल भारत बल्कि मॉरीशस से जुड़े रचनाकारों की सहभागिता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्वरूप लिए हुए था। पूरे कार्यक्रम में साहित्य, संवेदना और लघु काव्य की सशक्त अभिव्यक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए फायकू विधा के प्रवर्तक अमन कुमार त्यागी ने अपने उद्बोधन में फायकू को आधुनिक युग की प्रभावशाली लघु काव्य विधा बताया। उन्होंने कहा कि कम शब्दों में गहन भावों की अभिव्यक्ति ही फायकू की आत्मा है, जो आज के व्यस्त जीवन में अत्यंत प्रासंगिक बनती जा रही है।
मुख्य अतिथि डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय ने अपने विचार रखते हुए साहित्य की बदलती प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला और फायकू विधा की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह विधा नई पीढ़ी को सृजन के लिए प्रेरित कर रही है तथा भाषा को सरल, संक्षिप्त और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. अनिल शर्मा अनिल ने किया। उन्होंने फायकू की संरचना (4-3-2) को सहज और रोचक ढंग से प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को इस विधा से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया।
सम्मेलन में उपस्थित विभिन्न साहित्यकारों और वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए फायकू को अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया। उनका मानना रहा कि यह विधा साहित्य को नई दिशा देने के साथ-साथ युवा रचनाकारों को अपनी भावनाओं को सहज और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान मॉरीशस से पधारे गोवर्धनसिंह फ़ौदार सच्चिदानन्द सहित डॉ. भूपेंद्र कुमार, ईश्वरचंद्र विद्यावाचस्पति , लक्ष्मी सिंह, अक्षि त्यागी, विनीता चौरसिया, डॉ. अंजू बंसल, ममता श्रवण अग्रवाल, सुधीर श्रीवास्तव, मेजू राजानी, मोहित त्यागी, नीतू अग्रवाल, नीलम अग्रवाल, सत्येंद्र शर्मा तरंग, श्रीमती विनोद शर्मा, प्रो. शरद नारायण खरे, संजय प्रधान, पवन कुमार सूरज आदि फायकूकारों ने अपने-अपने फायकू पाठ प्रस्तुत किए। उनकी रचनाओं ने पूरे वातावरण को साहित्यिक रस से सराबोर कर दिया।
अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा आयोजन की सफलता के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई दी गई। यह सम्मेलन निश्चित रूप से फायकू विधा के प्रचार-प्रसार और साहित्यिक समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।




