
इस जहाँ की हर लौकिक रचना
को रचनेवाले हैं मजदूर,
मेहनतकश और कर्तव्यनिष्ठा की
सीधी-सादी पहचान है मजदूर।
गाँव में फूस की छप्पर से लेकर
खेतों की सोंधी मिट्टी की दलदल तक,
शहरों में भव्य अट्टालिकाएं मुस्कराती
हृदयस्पर्शी कलाकृति ताजमहल तक।
विस्मित कर देती है सबको
और सोचने पर कर देती है मजबूर,
इस जहाँ की हर कलात्मक कृति पर
अपनी अमिट छाप छोड़ देते हैं मजदूर।
हर सुख सुविधा का कर वो त्याग
परिश्रम करते हैं दिन-रात जाग,
कार्य से मुँह न मोड़ते कभी,क्योंकि
धधकती है सीने में जीविकोपार्जन की आग।
उद्योग,कारख़ाने इनकी मशक्कत पर टिके
उत्पादन हेतु लगा देते जी जान,
शिथिलता को पास न फटकने देते
मिले मजदूरों को भी मान-सम्मान।
संजय कुमार (अध्यापक )
इंटरस्तरीय गणपत सिंह उच्च विद्यालय,कहलगाँव
भागलपुर,बिहार




