
भटक रहे सब सुख पाने को ,कारज कर ले नेक।
बिन भागे ही मिल जाएगी, चुन ले रास्ता एक।।
खींचे भिन्न-भिन्न ही माया,बिछा हुआ है जाल।
युवा फंँसे अब आसानी से ,हो जाते बेहाल।।
तनिक समय में ही पीढ़ी की ,मांँग बढ़ी अतिरेक।
भटक रहे सब सुख पाने को, कारज कर ले नेक।।
तनिक मौन रहकर समझे, मन चाहे बस शांति ।
सद्पथ पर ही चलना सीखे ,छाए मुख पर कांति ।।
क्रोध दंभ को तज कर देखे, खोए नहीं विवेक।
भटक रहे सब सुख पाने को, कारज कर ले नेक।।
पैसा ही सब कुछ कब देता , भौतिक खुशी असीम।
ढूंँढे़ माटी में सच्चा सुख, कथन लगे क्यो नीम।।
ज्ञानी के वाणी में अति सुख, माथा जाए टेक।
भाग रहे सब सुख पाने को, कारज करले नेक।।




