साहित्य

पेपर लीक 

जय प्रकाश विश्वकर्मा

दौर फिर लीक माफियाओं का।

हौसला पस्त है युवाओं का।

 

लचर कानून और व्यवस्था है,

धर पकड़ है फ़क़त अदाओं का।

 

हौसले फिर से बढ़ गए इनके,

सर पे जो हाथ है आकाओं का।

 

असल सज़ा के हक़दार हैं वो,

काम करते हैं जो गुनाहों का।

 

नए बदलाव पर नज़र रखना,

यही तो काम रहनुमाओं का।

 

गोया सिस्टम में लग गये दीमक,

है बुरा हाल बाप माओं का।

रचना– जय प्रकाश विश्वकर्मा, मुंबई

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