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संगीता वर्मा

आज कविता पर कुछ लिखना है जो शब्दों और भावनाओं का ताना -बाना बुनती है वही कविता है जो हर शब्दों को कलम द्धारा उतार देती है वही कविता है, आज कविता पर कुछ लिखना है।

 

शब्दों के साँचे मे जो ढलकर जो रूह को छू जाये वही कविता है,भावनाओं के समुंदर मे उठती हुई अनमोल लहर, मन के सुनेपन को भरने वाली सावन की धरोवर, ही वही कविता है आज कविता पर कुछ लिखना है।

 

यह सिर्फ कागज पर स्याही का लिखना नही मन की लहरों की तरह शब्दों के साथ दिल का मचलना भी वही कविता है, कभी खुशी की बात कभी यादों का रात कभी बारिश की बूँद, कभी प्रेम, प्रतीक्षा को पिरोना ही वही कविता है आज कविता पर कुछ लिखना है।

 

शब्दों की दुनिया मे एक नया ख्याल लिखना है सोचती हूँ आज कविता पर कविता लिखना ही वही कविता है,भावनाओं के धागे से, अनकहे दर्द ,मन के कोने से कोई प्यारा गीत ही कविता है, देश के वीरों पर संगीत,संस्कृति वही कविता है, आज कविता पर कुछ लिखना है।

 

स्वरचित एवं मौलिक

संगीता वर्मा

कानपुर उत्तर प्रदेश

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