साहित्य

मेरे देश का जवान

कुलदीप सिंह

#ये देश का जवान भी देखो, कितना बदनसीब होता है,

अपने दर्द छुपाकर हर पल, वतन के करीब होता है।

देश के लिए जीता है, देश के लिए मर जाता है,

भारत माँ की रक्षा में, जीवन सारा धर जाता है।

 

माँ की ममता, बच्चों की हँसी, सब पीछे रह जाते हैं,

सीमा पर खड़े सिपाही, अपने फर्ज़ निभाते हैं।

होली हो या दीपावली, घर आना आसान नहीं,

बर्फ़ीली रातों में भी उनको मिलता आराम नहीं।

 

मोहोब्बत है उनको अपने वतन की मिट्टी से इतनी,

अपने सपनों से बढ़कर लगती भारत माँ की धरती।

जब-जब दुश्मन आँख उठाए, सीना तान खड़ा होता है,

अपनी जान की परवाह छोड़े, रण में अड़ा होता है।

 

उसकी साँसों में भारत है, उसकी धड़कन में तिरंगा है,

उसके साहस के आगे तो हर संकट भी बौना है।

आख़िरी साँसों तक भी वह देश का मान बढ़ाता है,

हँसते-हँसते मातृभूमि पर अपना शीश चढ़ाता है।

 

आओ मिलकर नमन करें हम उन वीरों के बलिदान को,

जिनके कारण सुरक्षित पाया हमने अपना हिंदुस्तान को।

ये देश का जवान भी देखो, कितना महान होता है,

अपने प्राण लुटाकर भी जो अमर जवान होता है।

 

 

 

कुलदीप सिंह रुहेला

सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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