
बंद करो यूंँ सीढ़ी की
तरह इस्तेमाल होना!!
तुम्हें मालूम तक नहीं है
यह लोग तुम्हारे,
पैरों तले की जमीन भी,
छीन रहे हैं!!
हर किसी के लिए तुम
मौका मत बनो!!
यह लोग तुम्हारी ज़िन्दगी के,
हसीन पल छीन रहे हैं!!
एक बार अगर,
उनके मंसूबे,
कामयाब हो गए,
तो यह तुम्हें पूछेंगे,भी नहीं!!
इन्हें सिर्फ़ अपने लिए
मंज़िल चाहिए
इन्सान यह किसी के,
भी नहीं!!
तुमको कोसेंगे ता-उम्र
तुम्हारी मुफ़्लिसी,
के लिए!!
यह कामयाब लोग हैं
तुम्हारी नाकामी गिनवाएंगे!!
तुम्हे अतृप्त जगह पहुंँचाएंँगे
जहांँ भूख होगी ना प्यास!!
बस करते रहोगे तुम
इनकी जयकार!!
बंद करो यूँ सीढ़ी की तरह,
इस्तेमाल होना…!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




