साहित्य

मंच को सादर नमन 🙏

संगीता वर्मा

मुद्दतों बाद भी उनका पैगाम नहीं मिला था, जैसे दौलत- ए-दो- जहां नही मिला था मेरे खत का कोई जवाब नही मिला था पर वो खत जो पोस्ट न हुए।

 

कभी ये फिक्र थी,वो याद क्यूं करेंगे हमें,कभी ये ख्याल था खत का जवाब आएगा, पर खत जो पोस्ट न हुए।

 

संभालकर रखे हुए खत जो मिले, जवाब- ए- खत में अहसास के पुर्जे मिले थे, बिखरे हुये सारे सफर मिले थे, वो देखने को मेरे हालात खड़े थे,पर खत जो पोस्ट न हुए।

 

धुंआ- धुंआ होती मेरी आँखों मेंउन लम्हों को उसने राख होते देखा था,अभी दिल संभाला ही था कि आज फिर कागज के पूर्जे ही मिले,पर खत जो पोस्ट न हुए।

 

फिर इक- इक टुकड़े दिल के हुए है, तेरी इन यादों के कारोबार में, तर्जुबा भी मेरा खूब हुआ है,हर हर्फ़ में,हर जिक्र में वो शामिल थे पर खत जो पोस्ट न हुए।

 

अब न रहा वो विश्वास न उम्मीदना प्रेम ना अहसास ना वो त्याग ना मिलन फिर क्यूंकि प्रेम के खत का वो जवाब नही मिला क्यूंकि खत वो पोस्ट ही नहीं हुए।

 

स्वरचित एवं मौलिक 🙏

संगीता वर्मा

कानपुर उत्तर प्रदेश

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