
दिव्य ज्योति लेकर आया हूँ,
मैं हिन्दू जगाने आया हूँ।
श्रीराम का सेवक हूँ मैं,
मैं साथ भरोसा लाया हूँ।।
सोई चेतना को जगाने,
घर-घर दीप जलाने आया हूँ।
ऋषियों की पावन वाणी का,
जन-जन में मान बढ़ाने आया हूँ।।
श्रीराम का सेवक हूँ मैं,
मैं साथ भरोसा लाया हूँ।।
वेदों की गौरव-गाथा को,
फिर से गाने आया हूँ।
भारत के स्वर्णिम वैभव का,
नव इतिहास बनाने आया हूँ।।
श्रीराम का सेवक हूँ मैं,
मैं साथ भरोसा लाया हूँ।।
धर्म, शील और सद्भावों का,
पावन दीप जलाने आया हूँ।
जाति-पाँति के भेद मिटाकर,
सबको गले लगाने आया हूँ।।
श्रीराम का सेवक हूँ मैं,
मैं साथ भरोसा लाया हूँ।।
प्रेम, करुणा और सेवा से,
नव समाज बनाने आया हूँ।
एकता का शुभ मंत्र लेकर,
जन-जन के बीच मैं आया हूँ।।
श्रीराम का सेवक हूँ मैं,
मैं साथ भरोसा लाया हूँ।।
राम, कृष्ण और शिव की महिमा,
हर हृदय में बसाने आया हूँ।
भारत माँ का गौरव फिर से,
विश्व शिखर पर पहुँचाने आया हूँ।।
श्रीराम का सेवक हूँ मैं,
मैं साथ भरोसा लाया हूँ।।
राष्ट्रधर्म की पावन राहों का,
संदेश नया मैं लाया हूँ।
दिव्य ज्योति लेकर आया हूँ,
मैं हिन्दू जगाने आया हूँ।।
कवि : दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’




