साहित्य

कान्हा की बात निराली

रिया राणावत 

द्वारिकाधीश की नगरी,

बड़ी मन मोहक,

गिरधारी के मस्तिष्क पर ,

मोर मुकुट सजे,

देखने में जो अत्यधिक सुंदर लगे ।

वस्त्र पहने पीत रंग के,

हाथ में मुरली धरे।

माँ के राज दुलारे ,

अशोधा सिर्फ कान्हा-कान्हा पुकारे।

ओर जब कान्हा की शिकायत आवे ,

टोह खूब दांत भी लगावे ।

मक्खन की मटकी फोड़े ,

गोवर्धन वो उठा लेवे।

अलग सी थी बात है,

गिरधारी सबके साथ है।

बस समझने की ये बात है,

हरदम द्वारिकाधीश अपने साथ है।।

 

– रिया राणावत

कालीदेवी, झाबुआ (मध्यप्रदेश)

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