
रूपसी ! सुनो ना ।
ख़फ़ा हो,कहो ना ।
कोप तो ,करो ना ।
संग घर,चलो ना ।
रूप जो, मिला है ।
फूल सा ,खिला है ।
प्यार का ,सिला है ।
अभी भी ,गिला है ।
रूठती , मनालूं ।
गिरो तो , सँभालूं ।
अंक में , उठा लूं ।
नयन में , बसा लूं ।
चाँदनी , रात में ।
घूमते , साथ में ।
बात ही , बात में ।
हाथ लिया,हाथ में ।
सरोज शर्मा
दिल्ली




