
हम घर में आराम से सोते,
वह सरहद पर पहरा देते।
हम अपनों के साथ है,
वह अपनों से दूर है रहते।
हम अपने मनाते त्यौहार ,
राखी भाई बहन का प्यार।
वह हर पल सीमा पर रहते,
छोड़कर अपना घर संसार।
सर्दी गर्मी हो चाहे बरसात,
फौजियों की अलग ही बात।
तनिक भी नहीं विचलित होते,
ड्यूटी निभाते हैं दिन हो या रात।
शव जब तिरंगे में लिपट आता,
हर देशवासी उनके गुण गाता।
मां भी करती बेटे पर अभिमान,
नमन उसे जो शहीद हो जाता।
सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।




