
दिनांक -१५/७/२०२६
विषय- गुत्फ़गू
शीर्षक- मीना कुमारी जी
मीना कुमारी जी की वो
खामोश गजल कहानी,
जज्बात-ए- मोहब्बत की
सोती हुई वीरानी।
ना हमसफ़र कोई गर मिला
चलती रही तन्हा, चांद तन्हा
आसमां है तन्हा दिल मिला
कहाँ – कहाँ तन्हाई।
जलती- बुझती सी रोशनी के
पर, सिमटी- सिमटी सी उनकी
जिंदगी की राह देखती सदियों
से कुछ पल खुशहालियों के।
बुझ गई आस, छुप गया तारा,
थरथरा रहा है धुआँ तन्हा- तन्हा
जिंदगी इसी को कहते है जिस्म
तन्हा और जां भी तन्हा।
ये आखिरी तन्हाई, बजती हुई
हर धड़कन की उनकी आवाज
ये मौत की शहनाई, बंद होती
हुई उनकी आँखे, बंद हो गई
उनकी आवाज।
स्वरचित एवं मौलिक रचना✍️
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश



