साहित्य

माता से स्तुति

डॉ मंजु गुप्ता

में मैया दे आशीषें

 

देना मुझको शक्ति माँ, रचे लेखनी काव्य।

हृदय विराजो माँ अभी , सिद्ध करो मन भाव्य।।

 

करी सदा माँ साधना, मन -तन से निःस्वार्थ।

देना मुझको माँ अभी , महाकाव्य में साथ।।

जय माँ गौरी मंगला , करती तेरी भक्ति।

देना साहस कलम को , भरना मन में शक्ति।।

मातृ भद्र काली तुम्हीं , करना नव उत्कर्ष।

किया जिंदगी में सदा , घर बाहर संघर्ष।।

आशीषें तेरी मिले, रच पाऊँ मैं छंद।

रचने में माँ आ रहा , मुझको अति आनंद।। डॉ मंजु गुप्ता

 

शक्ति छन्द शारदे माँ पदांत —  रगण 212

 

हमें बुद्धि दो शारदे मात हे,  कृपा ज्ञान की करो दिन – रात हे।

दया में तुम्हारी सदा मैं रहूँ,विषम हो दिशा तो सभी को सहूँ।।

जला दीप आरती का ही सदा, उजाला मिले कला का तदा।

तिमिर भाग जाता उसी रात जो, खिले भोर जीवन करें बात जो।।

डॉ.मंजु गुप्ता

वाशी , नवी मुंबई

……….

 

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उदाहरण- 6 साधिका –   शक्ति छन्द शारदे माँ पदांत —  रगण 212

बनी साधिका शारदे मात तू , करो माँ सदा ज्ञान बरसात तू।

शरण में तुम्हारी सदा मैं रहूँ,पड़े मग चुनौती कहीं भी  सहूँ।।

कला ज्ञान दे शारदे मात तू , करो माँ कृपा छंद बरसात तू।

सहारा मिले पास माँ के रहूँ, किनारा मिले दुःख मैं ही   सहूँ।।(डॉ मंजु गुप्ता

 

जुड़े तार वीणा सहारा बने,सजे मन  सदा शब्द सुर से सने।

रचूँ गीत तेरे निराले  सभी,भरो   नृत्य वादन उजाले अभी।।

करो  माँ सदा मति हृदय मन विमल,रहे ज्ञान संसार में माँ नवल।

लगन  मन  सदा शारदे से जुड़े,कृपा कर न संगीत से मन  मुड़े।।डॉ मंजु गुप्ता, वाशी नवी मुंबई।

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