
#नमन मंच🙏💐🙏
# ग्राम टुडे साहित्य पोर्ट के माटी के राजा थे महाराणा प्रताप।
चेतक घोड़े में सवार रहते थे महाराणा प्रताप।
हल्दीघाटी में गूंजी हुंकार हुए थे महाराणा प्रताप।
मुगलों से खूब लड़े वह थे वह महाराणा प्रताप।
घास फूस की रोटी खाकर।
अपने सिर को नहीं झुकाया वे थे महाराणा प्रताप।
जिनके आंखों में शौर्य था।
ज्वाला थी मस्तक पर था स्वाभिमान।
वे थे महाराणा प्रताप।
पैरों की आवाज से कांप जाते थे दुश्मन।
वह थे महाराणा प्रताप।
जंगल जंगल भटक कर खूब कष्ट सहे।
नहीं छोड़ा अपना धर्म वह थे महाराणा प्रताप।
महाराणा प्रताप का साहस देखकर।
सैनिक आगे बढ़ते थे।
दुश्मनों का सिर काट कर।
नया इतिहास रचते थे।
भारत माता के वीर सपूत गौरव की पहचान थी महाराणा प्रताप।
#स्वरचित मौलिक रचना।
#सुरेन्द्र कुमार बिन्दल कलमकार जयपुर राजस्थान।



