
को मंदिर मानकर, मन को बना पुजारी।
योग करे जो हर दिवस, कटे रोग बीमारी।।
सूरज की पहली किरण संग, आसन जब लग जाए।
सांस-सांस में शक्ति भर, भाग्य नया बन जाए।।
भाग-दौड़ की जिंदगी, तनाव रहे भरपूर।
योग की चादर ओढ़ लो, हो जाए सब दूर।।
बच्चे-बूढ़े सब करें, योग न कोई छोटा।
रोग-मुक्त जीवन मिले, यही योग का तोहफा।।
प्राणायाम से वायु शुद्ध, मन हो जाए शांत।
क्रोध-लोभ सब दूर हों, मिले सुख एकांत।।
मोबाइल को छोड़कर, चटाई पर आ जाओ।
योग दिवस के पर्व पर, जीवन नया बनाओ।।
ऋषि-मुनियों की थाती यह, भारत की पहचान।
योग से ही विश्व में, बढ़े देश का मान।।
एक घंटा योग का, चौबीसों पर भारी।
जो भी इसको अपनाए, उसकी बलिहारी।।
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज



