
तवन में अनुराग समाया, जागे स्वप्न हजार ।
राम-सिया के दृग टकराए, महक उठा मन प्यार ।।
अपलक राम निहारें प्रिय को, सिया शरम से लाल ।
प्रथम मिलन की मधुर घड़ी में, सीता हुई निहाल ।।
धड़कन हिय की तेज हुई है, दिल में बजे सितार।
राम-सिया के दृग टकराए, महक उठा मन प्यार ।।
छवि अनुपम राघव की देखी, खोई सुध-बुध आज ।
प्रियतम का सानिध्य अनूठा, पलक झुकी भर लाज ।।
बिना कहे सब बातें कह दी, प्रेम सुधा रस धार ।
राम-सिया के दृग टकराए, महक उठा मन प्यार ।
अधरों पर चुप्पी छायी थी, करें नयन अब बात ।
प्रीति सरोवर डूबे दोनों, भूले दिन अरु रात ।।
मुख मंडल मुस्कान समाई, नयनों में इकरार ।
राम-सिया के दृग टकराए, महक उठा मन प्यार ।।
हेमा जालान’कनक’ मुंगेर🙏🏼




