
पीड़ा जो है मानसिक,लाता है अवसाद।
फिर घेरे बीमारियां,व्यर्थ सभी फरियाद।।
व्यस्त सदा खुद को रखो,काज सदा रख पास..
कुंठा से रख दूरियां,समय न कर बर्बाद।
जीवन में कुछ नित नवल,प्यारे मन से सीख,
उदासियों का फिर नहीं,मन में होगा नाद।
खाली जहाँ दिमाग हो,घुसता है शैतान,
सुलझे नहीं विचार फिर, नहीं कहीं फिर स्वाद।
जीवन नव अध्याय नित,नहीं बात को गाँठ,
सब परिवर्तनशील है, इतना ही रख याद।।
वर्तिका अग्रवाल ‘वरदा’
वाराणसी
उ.प्र.




