साहित्य

श्रीराम -जानकी पुष्प वाटिका में मिलन 

हेमा जालान

तवन में अनुराग समाया, जागे स्वप्न हजार ।

राम-सिया के दृग टकराए, महक उठा मन प्यार ।।

 

अपलक राम निहारें प्रिय को, सिया शरम से लाल ।

प्रथम मिलन की मधुर घड़ी में, सीता हुई निहाल ।।

धड़कन हिय की तेज हुई है, दिल में बजे सितार।

राम-सिया के दृग टकराए, महक उठा मन प्यार ।।

 

छवि अनुपम राघव की देखी, खोई सुध-बुध आज ।

प्रियतम का सानिध्य अनूठा, पलक झुकी भर लाज ।।

बिना कहे सब बातें कह दी, प्रेम सुधा रस धार ।

राम-सिया के दृग टकराए, महक उठा मन प्यार ।

 

अधरों पर चुप्पी छायी थी, करें नयन अब बात ।

प्रीति सरोवर डूबे दोनों, भूले दिन अरु रात ।।

मुख मंडल मुस्कान समाई, नयनों में इकरार ।

राम-सिया के दृग टकराए, महक उठा मन प्यार ।।

 

हेमा जालान’कनक’ मुंगेर🙏🏼

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