
आज के समय भौतिक आपाधापी में वाहनों को उपयोग करते हुए दौड़ती भागती जिंदगी में ख़ुद के सुख सुकून और मौज मस्ती में उलझी हुई दुनियां को सत् सत् वंदन, जिंदगी जीने के लिए है स्वीकार है न चाहते हुए भी उनकी सोच वैसे जिंदगी कुछ बहुत कुछ कर गुजरने का नाम भी है
फिर भी यदि उनका मानना है कि यह व्यर्थ बकवास है मुश्किल से मानव जीवन मिला है जीयो मस्त हो धूम फिर खाना खा तीर्थ यात्रा कर आनंद और मस्ती में ठीक हैं यह भी मंजूर है पर
कम से कम इतना तो करे कि यह सब सुख सुकून मिलता रहे उसके लिए बहुत बहुत जरुरी है खुद को इतना स्वस्थ रखें इतनी फिटनेस हो कि व्यर्थ ब्लड फ्रेशर,शुगर आदि आदि सैकड़ों बीमारियों से दूर रहे तभी तो अच्छा सुख सुकून मिलता जी सकते हैं जरूरी है प्रतिदिन आठ दस किलों मीटर घूमना नित्य ही ईमानदारी से या योग या व्यायाम द्वारा प्रतिदिन शरीर निरोगी रखे और सुख सुकून से जिया जायफिर उम्र क्या करे स्वस्थ्य है तो सब कुछ है सुख है सुकून है आनंद है ऊर्जा है ताकत है ओर जिंदगी जीने का आनंद है तो क्यों नहीं आज से अभी से हम अपने स्वास्थ्य के लिए सम्मान से कर्म करें फिटनेश को बरकार रखें ताकि हमारा आनेवाला कल भी प्रेरणा ले अपना कुछ समय निकाल फिटनेश पर दस्तक दे स्वास्थ रहे मस्त रहे खुश रहे यह हम सब के लिए सम्मान की सुकून की बात होगी
डॉ रामशंकर चंचल
रंजीता निनामा जी
झाबुआ मध्य प्रदेश




