साहित्य

रिश्तों की गणित

डाॅ सुमन

रिश्तों की गणित बड़ी निराली,

जोड़-घटाव की अलग कहानी।

कभी प्रेम का गुणा बढ़ाता,

कभी मन में भाग बँट जाता।

 

मुस्कानों से जोड़ बने जब,

दूरियाँ सब शून्य हो जातीं।

विश्वास अगर गुणक बन जाए,

खुशियों की संख्या बढ़ जाती।

 

अहम् घटे तो प्रेम बढ़ेगा,

यह सूत्र सदा अपनाना।

मन के भावों का संतुलन रख,

जीवन को सुंदर बनाना।

 

कभी गलतियाँ जोड़ न देना,

क्षमा से उनको घटाना।

अपनों की कीमत समझो तुम,

मत उनको यूँ ही गँवाना।

 

रिश्ते हैं अनमोल समीकरण,

हल जिनका सरल नहीं होता।

स्नेह, धैर्य और त्याग मिलें जब,

हर प्रश्न सहज ही सुलझता।

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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