साहित्य

नींद से जागो आज सिपाही

डाॅ०-शिवकुमार

नींद से जागो आज सिपाही, देश पर आई आफ़त है।

तुम्हें देश की लाज है रखनी, आज बड़ी यह सांसत है।।

 

सीमाओं पर शत्रु खड़ा अब, आँख गड़ाए घात में।

भीतर भी कुछ लोग लगे हैं, अपने ही आघात में।।

उत्कोच बना व्यवहार यहाँ, कैसी बिगड़ी फितरत है।

नींद से जागो आज सिपाही, देश पर आई आफ़त है।।

 

वीर शिवा, राणा की गाथा, फिर से याद दिलानी है।

भगत,आज़ाद,सुभाषचंद्र में, ज्वाला आज जगानी है।

राष्ट्र-भाव बस चर्चा तक है, दिखती कहाँ इबादत है।

नींद से जागो आज सिपाही, देश पर आई आफ़त है।।

 

जाति-धर्म के भेद भुलाकर, एक ध्वजा लहराना होगा।

भारत माँ की आन-बान पर, हँसकर शीश चढ़ाना होगा।।

जन-जन में विश्वास जगे फिर, सबसे बड़ी ये ताकत है।

नींद से जागो आज सिपाही, देश पर आई आफ़त है।।

 

सत्य, साहस, त्याग, तपस्या, अपना जीवन-मंत्र बने।

विश्वगुरु भारत का सपना, जग का नव-आदर्श बने।।

माँ के चरणों में सब अर्पित, ‘शिव’ यह अंतिम हसरत है।

नींद से जागो आज सिपाही, देश पर आई आफ़त है।।

कविराज डाॅ०-शिवकुमार सिंह ‘शिव’

दुसौंती रायबरेली-२२९३०६

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