
नहीं भारत का अपना दिवस
ना ही कोई तीज त्यौहार,
वैलन्टाइन दिवस क्यों मना रहे
जिस दिन रक्त बहा शहीदों का ।
बना काला दिन इतिहास का
जम्मू कश्मीर राजमार्ग भरा लहू से,
थे बसों में सी.आर.पी.एफ जवान
एक कार टकराई सामने से आकर।
हुआ विस्फोट भारी था
धुआँ काला चारों तरफ छाया,
हटा धुआँ, देख हैरान सब
फटा कलेजा परेशान थे सब।
चारों ओर रक्त ही रक्त बहा
जवानों के शरीर के टुकड़े बिखरे,
हाथ-पाँव किसी के कहीं पड़े
किसी शरीर के परखच्चे उड़े थे।
कायर है पाक, कुकृत्य करता
पीठ पीछे से वार भारत पर करता
हुये नयन सजल माँ बहन बेटा-बेटी
छोड़ वो जवान शहीद हुये।
आया कैसा वो पल था
रक्त से लिखी जवानों की कहानी,
पुलवामा के चालीस शेर रक्तरंजीत
दुश्मन अपनी कायरता दिखा रहा।
वक्त ने बेवक्त दिखाया
दुःख और क्रोध साथ थे,
कर रहे थे याद पल-पल
बलिदानियों की विजय गाथा के।
रो पड़ी माँ गंगा-यमुना-
कावेरी और नर्मदा,
घिरे बादल,रोया वो आसमान
सहमी हवा वो बही मंद-मंद।
हो जर्जर वक्त थमा
बड़ा भयानक था मंजर,
मानव ही मानव का दुश्मन
दुष्ट-दुष्टता दिखा गया।
माना बारह दिन बाद
लिया बदला सैनिकों का,
की बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक
मार गिराया सभी आतंकियों को।
धन्य है हमारे भारतीय सैनिक
और धन्यवाद है भारतीय सेना
नमन कर हाथ सब जोड़ रहे
शत-शत नमन,श्रद्धांजलि
दे रहे।
सभी वीर जवानों की जय
भारत माता की जय
वन्देमातरम, जय हो
डॉ. प्रभा जैन “श्री ”
देहरादून




