साहित्य

प्रतिदिन पांच मिनट, सोने से पहले यह सोचे आज हमने क्या किया बहुत है यह

डॉ रामशंकर चंचल 

प्रतिदिन पांच मिनट, सोने से पहले यह सोचे ,आज हमने क्या किया, बहुत है यह,,,

 

 

हर व्यक्ति प्रतिदिन पांच मिनट सोने से पहले यह सोचे रोज़ कि हमने क्या किया आज इतना भी बहुत होग जीवन को कुछ हद तक सही दिशा देने के लिए

 

जब आप सोचेंगे कि कुछ नहीं खाया पिया और रात हो गई सो गए, जेबी प्रतिदिन यही सौ जन्म लेगी तो आप ख़ुद अपने जीवन से असंतुष होगे यह अद्भुत सत्य है

 

वरना सारी जिंदगी निकाल देगे रोज़ की तरह खा, पी कर मौज मस्ती में फिर जेबी अंत समय आता है हर मानव हर व्यक्ति के दिल और दिमाग में दस्तक देता है अपना जीवन जो उसने अभी तक जीया है और अक्सर लोग इस वक्त सचमुच बहुत दुःखी होते है यह बात और है कि यह बोलते नही कि जिंदगी व्यर्थ निकल गई कुछ नहीं किया बस खाया पिया

जैसे जिंदगी इसी का नाम है

कभी कभी ये लोग कुछ खास अपनो के सामने बोलते हुए भी देखा है कि जिंदगी में कुछ किया नहीं दुःख है यूं ही निकल दी

 

इसलिए जिंदगी को सुख सुकून से जीते हुए कुछ ऐसा भी कर जाय जो और को सुख सुकून दे

ओर पल जीवन में आपको बहुत बहुत ज्यादा अच्छा लगेगा और सुख सुकून देगा यह सत्य स्वीकार करें तो भी हम शायद जीवन में जीते हुए कुछ न कुछ अच्छा कर जायेंगे जो सबसे ज्यादा अच्छा आपको ही महसूस होगा

 

 

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

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