साहित्य

रथयात्रा

डॉ.बसंत श्रीवास

द्विज तिथि शुक्लपक्ष आज,

मास आषाढ़ रथ का त्यौहार।

सजे रथ जगन्नाथ धाम में हली,

दृश्य कृष्ण सुभद्रा का प्यार ।।

 

भाई बहन का प्यार है गहरा,

संग साथ मौसी(गुंडीचा)घर जाना है।।

मौसी की है प्यार अनोखी,

आओ मिलकर रथ सजाना है ।।

 

कृष्ण रथ के सोलह चक्के,

नंदिघोष है नाम जो रथ का।

चौदह चक्के रथ तालध्वज,

है लाल हरे ध्वज बलभद्र का ।

 

सुभद्रा रथ के हैं बारह चक्के,

दर्पदलन, पद्म रथ कहलाते हैं।

बच्चे -बूढ़े सभी जन यात्रा में,

हो शामिल खुशी के गीत गाते हैं ।।

 

दृश्य  मनोहर सूंदर झाँकी,

रथ यात्रा सब के मन को भाते हैं।

देश विदेश के सब हिन्दू जन,

देखने शोभायात्रा पूरी को आते है ।। का

 

डॉ.बसंत श्रीवास *”वसंत”* (नरगोड़ा)

रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर

छत्तीसगढ़

 

*आप सभी को परिवार सहित रथ यात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं*

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