जय विनायक, गजमुख धारी,
सिद्धि विनायक, संकट हारी,
प्रथम पूज्य हो जग में सारे,
तेरे चरणों में हैं शीश हमारे।
मूषक वाहन, पीताम्बर सोहे,
हाथ में मोदक, सबको मोहे,
एकदंत तुम, चतुर्भुज स्वामी,
लम्बोदर, जग के अन्तर्यामी।
रिद्धि-सिद्धि के दाता तुम हो,
बुद्धि-विवेक के ज्ञाता तुम हो,
हे प्रभु जो ध्यावे तेरा नाम,
उसके मिट गये कष्ट तमाम।
भाद्रपद की चतुर्थी प्यारी,
धरती पर अवतरते हो भारी,
घर-घर गूंजे जयकारे तेरे,
आंगन महके फूलों से तेरे।
विघ्नों को तुम दूर भगाते,
कारज सबके सिद्ध कराते,
तेरी कृपा से सब अंधियारा,
जीवन में बन जाए उजियारा।
जय विनायक, जय गजानन,
सिद्धि विनायक, विघ्न विनाशन,
तेरी वंदना नित नित मैं गाऊं
तेरा सहारा प्रभु सदा मैं पाऊँ।
हे गजानन, बुद्धि देना, ज्ञान देना,
हर काम में सफलता, मान देना,
आदित्य सुखशांति, समृद्धि देना,
तेरे चरणों की भक्ति सदा देना।
। ॐ गं गणपतये नमः।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ




