साहित्य

दोहों में महावीर प्रसाद द्विवेदी

डॉमंजु गुप्तावाशी

‘सरस्वती’ के मंच से , दिया शुद्ध जग ज्ञान।

रूप खड़ी बोली खरी, परिचय दिया महान॥

हिंदी को श्रृंगार दे, लेखक देश-पुकार।

महावीर के ज्ञान से,महक रहा संसार॥

करी खड़ी बोली सही, भाषा को दे मोद।

हिंदी सेवा से भरी , राष्ट्र भक्ति की गोद।।

दे निखार लेखक कलम , हिंदी को चमकाय।

गद्य-पद्य दोनों सजे ,जन-मन को महाकाय॥

ज्ञान-विज्ञान समेट कर, रच निबंध अनूप।

गुन सुबोध हिंदी बिखर , सुंदर भाषा रूप॥

 

‘कवि और कविता’ कहें, क्या ह लेखन धार।

दिया द्विवेदी की कलम , हमें ज्ञान भंडार।।

मिली विरासत देश जग, हिंदी का साहित्य।

मार्गदर्श नवनस्ल का ,करता है यह नित्य।।

मंच पत्रिका से बहे, देश प्रेम की धार।

सारा भारत को जगा, महकी प्रेम बहार।।

दूर रूढ़ियों को किया , मिटा दिया अज्ञान।

दीप ज्योत बन ज्ञान की , फैला दिया विहान।।

नष्ट कुप्रथा थी करी , मिटा अंधविश्वास।

संस्कृति साहित्य से रचा, नव हिंदी इतिहास।।

डॉमंजु गुप्तावाशी , नवी मुंबई

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