
जीवन केवल अहसास के सिवा चल रहा है बस इसके अतिरिक्त कही कुछ नहीं, केवल एक अहसास है कि तुम हो सदा ही साथ,हर पल,हर समय जो एक अद्भुत ऊर्जा दे न जाने कितना कुछ सृजन होता हैं सोच खुद चौक जाता हैं
सचमुच ईश्वरीय तुल्य है यह सुखद अहसास कि तुम हो हर समय मेरे ख्याल रहे, मेरी चिंता किए पूर्ण आस्था और आत्मा विश्वास रहता है सदा ही यही आत्मा विश्वास बेहिसाब इतिहास रच रहा है चौक जाता हूं ईश्वर के इस ईश्वरीय रूह को सदा ही साथ महसूस करते हुए न जाने कितना कुछ कर जाता हूं कि ख़ुद चौका हुआ रहता हूं
प्रणाम सत् सत् प्रणाम है ईश्वरीय शक्ति रूह सदा ही मन आत्मा पावन पवित्र बनी रहे चरित्र बना रहे मानव मात्र पशु पक्षी सभी को सादर प्रणाम करते हुए प्यार करता रहा हूं बस बहुत है शेष जीवन व्यतीत करने में
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




