सृष्टि के कण कण में जीवन,
वसुधा की पीड़ा से ये तन।
देती है माटी हमको जीवन,
होती मै अपनी पाले तन मन ।
शीतल धारा डोरी सा जीवन,
बिन जल जीवन नहीं तन मन।
अग्नि पेट की हो या ज्ञानी मन,
जगता इससे सबका है जीवन।
अदृश्य रहे पर स्वास चले नित,
नश्वर जीवन का काया जीवन।
जल ,थल, पावक, गगन, समीर।
पंच तत्व से बंधा ये जीवन जन।
स्वरचित
मीना तिवारी
पुणे




