साहित्य

दिल दीवाना होता है

डॉ. विनय कुमार

दिल तो दीवाना होता है,

कब कहाँ किस पर आ जाए ये पता नहीं।

चाहत जब पैदा होती है,

कब किससे दिल लग जाए ये पता नहीं।।

 

ये प्यार मस्ताना होता है,

कब कौन जानेमन बन जाए ये पता नहीं।

उल्फ़त जब पैदा होती है,

दिलों की धड़कन बन जाए ये पता नहीं।।

 

दिन का चैन वो खोता है,

रातों की नींद तक उड़ जाए ये पता नहीं।

ये उलझन हरदम होती है,

दिलरुबा संग कब हो जाए ये पता नहीं।।

 

कदमों का आहट होता है,

लगता शायद यहाँ आ जाए ये पता नहीं।

घुँघरू की आवाजें होती हैं,

इंतजार ये कैसे सहा जाए ये पता नहीं।।

 

प्रेम रोग में तड़पन होता है,

ये कितना किसे सता जाए ये पता नहीं।

सपनों में ये रूपसी होती है,

स्वप्न टूटने से बिखर जाए ये पता नहीं।।

 

प्रेम दीवानों में प्रेम होता है,

प्रेयसी बस नजर आ जाए ये पता नहीं।

प्यार की तो चाहत होती है,

यह मधुर मिलन हो जाए ये पता नहीं।।

 

दो दिलों से ही प्रेम होता है,

एकदूजे से ये प्रेम हो जाए ये पता नहीं।

प्यार की भी बोली होती है,

बिन बोले समझ में आए ये पता नहीं।।

 

नैनों का वो इशारा होता है,

प्रेमी प्रेमिका जान हैं जाए ये पता नहीं।

विरह अग्नि ये जो होती है,

इसमें कितना जला जाए ये पता नहीं।।

 

दिल तो दीवाना होता है,

कब कहाँ किस पर आ जाए ये पता नहीं।

चाहत जब पैदा होती है,

कब किससे दिल लग जाए ये पता नहीं।।

 

सर्वाधिकार सुरक्षित ©®

 

रचयिता :

*ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमा श्रीवास्तव*

सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी. कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.

(शिक्षक कवि लेखक साहित्यकार समीक्षक समाजसेवी)

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