
पहले गुरु माता-पिता, जग से हमें मिलाया ।
द्वितीय पर शिक्षक रहे, मन का तमस भगाया ।।१।।
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शुभ चिंतक गुरु से लगे, अच्छा मार्ग दिखाया ।
मित्रों की तो बात क्या, जीवन ढंग बताया ।।२।।
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सर्विस या व्यापार में, जिसने गुर बतलाये ।
गुरु से कम वह भी नहीं, जीवन सफल बनाये ।।३।।
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कला-गीत संगीत में, गुरु को पूजा जाता ।
नेता के जो गुण भरे, वह तो भाग्य विधाता ।।४।।
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काले धंधे जो करें, गुरु को शीश नवाते ।
और गुरू-घंटाल भी, चरणों में पड़ जाते ।।५।।
*-राम किशोर वर्मा*
जयपुर (राजस्थान)
दिनांक:- २७-०७-२०२६ सोमवार




