साहित्य

मुक्तामणि छंद गुरु

राम किशोर वर्मा

पहले गुरु माता-पिता, जग से हमें मिलाया ।

द्वितीय पर शिक्षक रहे, मन का तमस भगाया ।।१।।

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शुभ चिंतक गुरु से लगे, अच्छा मार्ग दिखाया ।

मित्रों की तो बात क्या, जीवन ढंग बताया ।।२।।

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सर्विस या व्यापार में, जिसने गुर बतलाये ।

गुरु से कम वह भी नहीं, जीवन सफल बनाये ।।३।।

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कला-गीत संगीत में, गुरु को पूजा जाता ।

नेता के जो गुण भरे, वह तो भाग्य विधाता ।।४।।

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काले धंधे जो करें, गुरु को शीश नवाते ।

और गुरू-घंटाल भी, चरणों में पड़ जाते ।।५।।

*-राम किशोर वर्मा*

जयपुर (राजस्थान)

दिनांक:- २७-०७-२०२६ सोमवार

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