
बन के तस्वीर एक दिन,दीवार पर टंग जाना है।
दुनिया से दूर हमें सितारों, सा रंग जाना है।।
कर जाएं सार्थक जीवन, अपना सत्कर्मों से।
बस यही सब ही उपर, हमारे संग जाना है।।
2
यह न जलती हैऔर, यह न ही गलती है।
दुयाओं की यह दौलत,कभी नहीं मरती है।।
मत संकोच करो कभी,दुआ लेनेऔर देने में।
जिंदगी के साथऔर,बाद भी यह चलती है।।
3
इत्र की महक दामन में,नहीं किरदार में लाओ।
कामआकर सबकेआदमी,समझदार कहलाओ।।
नेकी बदी सब जिंदा रहती,हर एक के दिल में।
बन कर जिंदगी के तुम, वफादार ही जाओ।।
4
अहम गरुर चाहत सब, एक राख बन जाती है।
मिट्टी की देह एक दिन, बस खाक बन जाती है।।
धन दौलत शौहरत नहीं, जुबान मीठी है भाती।
यही चल कर तेरा ,सम्मान नाक बन जाती है।।
5
कर जाओ ऐसा,कि डोली यादों की सजती रहे।
मिलने को यह दुनिया, राह तेरी तकती रहे।।
हर दिल में जगह बन जाए,जरूर तेरे नाम की।
परदा गिरने के बाद भी,ताली यों ही बजती रहे।।
रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली।।
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