
मध्य प्रदेश आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ के महान व्यक्तित्व साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल ने अपनी अनेक अनेक राष्ट्रीय प्रकाशन बाल कृतियों को जो आशु प्रकाशन इलाहाबाद, अनुभूति प्रकाशन, जन चेतना प्रकाशन इलाहाबाद से नई दिल्ली नेशनल ट्रस्ट बुक देश के ख्यातीप्राप्त प्रकाशक से निकली
पर्यावरण पुजारिन, बड़ा आदमी,
बदल है गांव आदि आदि अनेक राष्ट्रीय प्रकाशन को जीवन में बेहिसाब कृतियों को भेंट किया झाबुआ जिले की अनेक विद्यालयों में ये सभी वो कृतियां है जो हिंदी भाषा प्रान्त मध्य प्रदेश, बिहार,उतर प्रदेश की सरकारी स्कूल में ग्रामीण वाचनालयों में
शासन प्रशासन द्वारा खरीदी गई
डॉ रामशंकर चंचल ने अपने जीवन में सदा ही किताबों के महत्व और अस्तित्व को सामने रखते हुए सैकड़ों कृतियों के प्रकाशन के साथ साथ उन्हें देश और दुनिया के सामने रखते हुए सार्थक किया उनके जीवन का उद्देश्य कृतियां निकलना ही नहीं उन्हें देश और दुनिया के हजारों हजारों के सामने रखते हुए साहित्य से जोड़े रखना है आज सैकड़ों युवा पीढ़ी के उन्हें पढ़ कर साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त नाम बन गए है और यह डॉ रामशंकर चंचल अपने जीवन का शोभाग्य मानती हैं
वंदनीय है सचमुच वंदनीय है डॉ रामशंकर चंचल जिन्होंने बाल साहित्य और साहित्य दोनों पर दस्तक देती आजीवन कमल चलाई और आज देश और दुनिया को साहित्य जगत में सैकडो हिन्दी कृतियों से नवाजा है
झाबुआ जैसे पिछड़े अंचल की पावन धारा धन्य हुई डॉ रामशंकर चंचल जैसे मां सरस्वती पुत्र को जन्म दे जिसने वो इतिहास रचा है जो सदियों जिन्दा रहेगा
आज उनके बाल साहित्य लेखन पर दस्तक देती तीसरी पी एच डी जल्दी ही आने वाली है
झाबुआ जिले की पावन धरा पर पहली बार झाबुआ के किसी साहित्य साधक पर पी एच डी वह भी तीसरी आ रही हैं
साहित्य ही नहीं बाल साहित्य में भी उनके अद्भुत योगदान को सालों याद किया जायेगा




