
बूंद-बूंद बरसे घटा, धरती हरी-भरी,
सावन आया झूम के, लाई खुशियां ढेरी।
पीपल-पत्ते झूमते, झूले पड़े डार,
राधा-कृष्णा गीत गाएं, गूंजे बंसी की तान।
हर-हर महादेव गूंजे, शिव मंदिर में शोर,
बेल-पत्र, जल चढ़े, भक्तों की भीड़ घनघोर।
मेंहदी के रंग, सोलह श्रृंगार,
सावन की फुहारों में भीगे सब त्योहार।
बोलो हर महादेव!




