
छुट्टी के दिन आ गये
नानी के घर जाऊँगा
ननिहाल से सारे मज़े
झोली भर-भर लाऊँगा..
छुट्टी के दिन…. ।

मैं नाना का चन्दा-तारा
प्यारा राज दुलारा हूँ
नानी के नयनों में रहता
सबसे उसको प्यारा हूँ
खाऊँगा मैं खूब मिठाई
मस्ती भी मैं खूब करूँगा
*वंशील,क्यारा, कियान,व्योम*
मिलकर सबके साथ रहूँगा..
छुट्टी के दिन…. ।
मामा का मैं बड़ा चहेता
लड्डू – लड्डू मुझे बुलाते
सुन्दर खेल-खिलोने लाते
मुझसे नहीं वो कभी अघाते
मामी मेरी भले सख्त है
कभी दुलारे कभी डाँटती
कभी सुनाती मीठी लोरियाँ
दिन ये कभी नहीं भूलूंँगा…
छुट्टी के दिन…. ।
(गोवर्धनसिंह फ़ौदार ‘सच्चिदानन्द’)
पता :मॉरीशस ।

