साहित्य

दुनियादारी की पाठशाला

दया भट्ट दया

*ज्ञान* ने सिखाया —
कैसे उड़ान भरनी है,
कैसे शब्दों में अर्थ गढ़ना है,
कैसे सिद्धांतों की सीढ़ियाँ चढ़नी हैं।
पर *जीवन* ने सिखाया—
कैसे मौन रहना है जब सत्य भी पराजित हो,
कैसे झुकना है जब अहंकार सिर उठाए,
कैसे मुस्कान ओढ़नी है
जब भीतर कोई रोता हो।
*दुनियादारी* —
यह किताबों में नहीं मिलती,
यह भीड़ में खोकर खुद को पाने की कला है।
यह सिखाती है —
कब बोलना है, कब चुप रहना है,
कब हारकर भी जीत जाना है।
कितनी ही योग्यताएँ हो तुम्हारे पास,
पर जब तक सीख न लो
लोगों के बीच लोगों की तरह जीना,
तब तक ज्ञान अधूरा है,
और सफलता सिर्फ एक भ्रम।

*दया भट्ट दया*

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!