बिहार

आत्मविश्वास और धैर्य की प्रेरक बालकथाएँ लिखती हैं डॉ. अनीता पंडा : सिद्धेश्वर

पटना | 15 दिसंबर / डॉ. अनीता पंडा ‘अन्वी’ की बालकथा “बीज से वृक्ष तक” बाल-साहित्य के मूल उद्देश्य—संवेदनशीलता, आत्मविश्वास और जीवन-मूल्यों के विकास—को सहज एवं प्रभावी रूप में प्रस्तुत करती है। कथा का केंद्रीय भाव धैर्य, परिश्रम और आत्म-स्वीकृति है, जिसे बीज के सशक्त प्रतीक के माध्यम से बालमन तक पहुँचाया गया है।
भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में गूगल मीट तथा फेसबुक पेज ‘अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका’ पर आयोजित ‘हेलो फेसबुक बाल-साहित्य सम्मेलन’ का संचालन करते हुए संयोजक सिद्धेश्वर ने कहा कि सार्थक बाल-साहित्य वही है, जो मनोरंजन के साथ ज्ञान, विवेक और नैतिक मूल्यों का विकास करे। आज का बच्चा विज्ञान-बोध और तार्किक दृष्टि के साथ संसार को समझ रहा है, ऐसे में बाल-साहित्य की भूमिका और अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है।
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अनीता पंडा ने सफल आयोजन के लिए सभी रचनाकारों को बधाई देते हुए कहा कि बच्चों के लिए लिखने हेतु लेखक को स्वयं भी सरल, संवेदनशील और निष्कपट बनना पड़ता है।
कार्यक्रम में डॉ. अनुज प्रभात की व्यंग्य रचना “दंगल : स्त्रीलिंग से पुलिंग तक”, नंदकिशोर मिश्र की बाल कविता “हम आगे बढ़ते जाएँगे”, नंदकुमार आदित्य की रचना “तेरह दिसंबर” तथा राज प्रिया रानी की बाल कविताएँ “बाबा की सीख” और “मैं भी स्कूल जाऊँगा” विशेष रूप से सराही गईं।
अंत में सिद्धेश्वर ने “बाल ग़ज़ल” और “गुब्बारे” शीर्षक से बाल कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिन्हें बच्चों में पठन-पाठन के प्रति रुचि जगाने वाला प्रयोग बताया गया। सभी रचनाकारों को साधुवाद देते हुए श्रेष्ठ बाल-साहित्य के निर्माण की आशा व्यक्त की गई।(
प्रस्तुति : बीना गुप्ता)

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